poetry

मैं

अब नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहती हु मैं झूटी ही सही सबकी बाते सुनना चाहती हु मैं आंखे खोल के ही सही सपने देखना चाहती मैं अब नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहती हु मैं —— बिना पारो के ही आसमान में उड़ना चाहती हु मैं रात के अँधेरे में सपनो की दुनिया देखना चाहती हु मैं ख्वाहिशो को लेकर इस भीड़ में चलना चाहती हु मैं अब नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहती…

Continue reading