poetry

तलाश

ना जाने किस चीज की तलाश है मुझे चिड़ियों को तैरते देखने का या फिर मछलियों की सवारी करने का नदी को एक घूंट में पिने का या फिर समुन्दर को बोतल में भरने का अब तो सूरज भी जलाता है मुझे ये एहसास दिलाता है की वो भी है यहां फिर भी ना जाने किस चीज की तलाश हैं मुझे झरने को ऊपर उठाते देखने का या फिर मोरों को गाते सुनने का भवरों…

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