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लेते आना

जब भी आना कुछ बाते, कुछ वादे लेते आनाकुछ अपने शहर की गर्मी, कुछ शर्दी लेते आनायहां अभी भी घूमते है कुछ पराये लोगमैं तुम्हारी और तुम इनके बन जाना जब भी आना कुछ अपने शहर की मिट्टी, कुछ अपने खेत की हरियाली लेते आनाकुछ अपने घर की गूंजती हसी और वो तुलसी भी लेते आनाये आंगन अभी भी सुना हैइठलाऊँगी मैं इसमें और तुम भी सुकून से सो जाना जब भी आना कुछ उस…

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याद है मुझे

याद है मुझे वो मिटटी के घर और उनपे सजे छज्जे याद है मुझे वो छोटा सा आंगन और उसमे बिखरे तुलसी के पत्ते वो छोटी सी फुलवारी, वो मम्मी की साड़ी हा मुझे याद है वो हमारी पाठ पे छोटे छोटे से बास्ते कुछ बर्तनो के शोर, कुछ लोगो के सटे हुए चेहरे वो छोटी – छोटी खेतो की क्यारी, वो पापा की साइकिल की सवारी हा सब याद है मुझे याद है मुझे…

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