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लाल बिंदी

नदी में बहती हुई बिंदी कभी पथरो से टकरा कर घायल हुई तो कभी झरने के पानी को पी कर निहाल हुई बहते हुए पत्ते पे कभी सवार हुई कही अटकी तो कभी पार हुई उस हिरे के टुकड़े को जड़ लिया खुद पे, तो भीग के भी चमक उठी पंछीओ ने उसकी खूबसूरती को पाना चाहा तो सभी पंछीओ में तकरार हुई आखिरी में लगी हाथ एक गौरैया के तो गौरैया उसे उड़ा ले…

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राख सी मिट्टी

राख सी उड़ती मिट्टी जीना भूल गई उठाना भूल गई, लड़ना भूल गई, और पिघलना भी भूल गई कोई आस रही नहीं, कोई ख्वाहिश बची नहीं वो धड़कते हुए दिल भी खो गए इस जहाँ में बादल भी उड़ाते बिखरते कही और चले उसकी तलाश में अब वो मिल गई है उस धुएं में तो रुकेगी नहीं, वो कभी वापस लौटेगी नहीं राख सी उड़ाती मिट्टी जीना भूल गई नदियों को बुलाना भूल गई, उन…

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जिंदगी

ये जिंदगी और कुछ नहीं , मेरा ही किस्सा है दोहरा कर जिऊँ या फिर एक बार सब एक ही जैसा है दिल निकल आया है हांथो में और आग लिपट जाती है आँखो से जब भी जीने का जूनून छाता है सपने लिए उड़ती हूँ मैं कही गिर न जाऊ इसका भी ख्याल आता है कभी बड़ी लगती है ये जिंदगी, तो कभी लगती है छोटी इतनी ख्वाहिशें है , कोई पीछे न छूट…

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The oversea war

I don’t know to whom I should standI don’t know for whom I should crythose unhealthy and unfamiliar howlshitting me hardI should say something, I should do somethingbut not todaybecause it’s overwhelming, it feels like I will diethis oversea fight, still I can seepeople are lurking under the depth of the crowdthat painless body, hurting chest and teary eyesI don’t know what to sayI don’t know for whom I should praytheir voices piercing into my…

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