poetry

शाम

दो वक़्त शाम के साथ

कुछ बाते उसकी निगाहों में रह गई और हम उन बातो में खो गए

कुछ वक़्त गुजारा जब इस शाम के साथ तो ख्याल भी पानी की तरह बह गए

जब हाथ मिलाया उससे तो उसके सुन्दर स्पर्श से हम भी मुलायम मखमली हो लिए

उस समय में वो चाय इतनी मीठी क्यों थी यही सोचते – सोचते उसी वक़्त में रह गए

उस शाम की अंगड़ाई में ऐसा दिल लगा लिया की

वापस आते वक़्त अपने दिल को वापस लाना ही भूल गए |

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